शुक्रवार 14 अगस्त 2026 - 10:52
अल्लामा मिस्बाह यज़दी: अहले बैत (अ) से तवस्सुल व्यवस्था की स्थिरता और समाज की सुरक्षा की गारंटी है

स्वर्गीय अल्लामा मुहम्मद तक़ी मिस्बाह यज़दी ने अहले बैत (अ) से लगातार तवस्सुल करने के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि मोमिनों को अपने हर फैसले और कार्य में हज़रत वली-ए-अस्र इमाम महदी (अ) की ओर ध्यान रखना चाहिए और अपनी जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ ईमान, व्यवस्था और समाज की सुरक्षा के लिए अहले बैत अलैहिमुस्सलाम का दामन थामे रखना चाहिए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, स्वर्गीय अल्लामा मुहम्मद तक़ी मिस्बाह यज़दी ने अहले बैत (अ) से लगातार तवस्सुल करने के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि मोमिनों को अपने हर फैसले और कार्य में हज़रत वली-ए-अस्र इमाम महदी (अ) की ओर ध्यान रखना चाहिए और अपनी जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ ईमान, व्यवस्था और समाज की सुरक्षा के लिए अहले बैत (अ) का दामन थामे रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इंसान को सामने आने वाले खतरों से सुरक्षित रखने वाली महत्वपूर्ण चीज़ अहले बैत (अ) से लगातार तवस्सुल करना है। इंसान जब भी कोई कदम उठाए, तो सबसे पहले हज़रत वली-ए-अस्र (अ) की बारगाह की ओर ध्यान करे और अर्ज़ करे: “मौला! मैं आपकी सेवा के लिए कदम उठा रहा हूँ, आप स्वयं मेरी मदद फरमाएं, ताकि वही हो जिसमें आप भलाई और हित समझते हैं।”

अल्लामा मिस्बाह यज़दी ने स्पष्ट किया कि हम अपनी जिम्मेदारी समझकर काम करने की कोशिश करते हैं, लेकिन हमें हमेशा वास्तविक हित और भलाई का ज्ञान नहीं होता। इसलिए अपने दिल, ईमान और कर्मों को अहले बैत (अ) के हवाले कर देना चाहिए और उनसे दुआ करनी चाहिए कि वे हमारा हाथ थामे रखें और हमें फिसलने से सुरक्षित रखें।

उन्होंने अफसोस व्यक्त किया कि कभी-कभी हम दूसरों को व्यक्तिगत परेशानियों में तवस्सुल करने की सलाह देते हैं, लेकिन देश और समाज के महत्वपूर्ण मामलों में इस आध्यात्मिक माध्यम को भूल जाते हैं। उन्होंने मोमिनों को ज़ियारत-ए-आशूरा की पाबंदी करने, हज़रत सय्यदुश्शोहदा इमाम हुसैन (अ) की याद में खाना खिलाने तथा अहले बैत (अ), विशेष रूप से इमाम हुसैन (अ) से प्रेम और लगाव को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाने की ताकीद की।

अल्लामा मिस्बाह यज़दी ने कहा कि यही लगाव इस्लामी व्यवस्था की स्थिरता, समाज की प्रगति और शैतानी रास्तों से सुरक्षित रहने का महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने दुआ की कि अल्लाह कभी ऐसा समय न लाए कि इंसान का दामन अहले बैत (अ), विशेष रूप से इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम से छूट जाए।

स्रोत: अल्लामा मिस्बाह यज़दी के वक्तव्य, 26 दी 1390।

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